हवन कुंड की आग से निकलता धुआं मीरा की आँखों में जलन पैदा कर रहा था, लेकिन उसकी आँखों से निकलने वाले आँसू उस जलन से कहीं ज्यादा गहरे थे। लाल रंग का भारी जोड़ा, जो किसी भी दुल्हन के लिए खुशियों का प्रतीक होता है, आज मीरा के लिए कफ़न जैसा महसूस हो रहा था। उसके हाथ कांप रहे थे, लेकिन उसके पास खड़े उसके मामा-मामी की पकड़ इतनी मजबूत थी कि उसे हिलने तक की इजाजत नहीं थी।
"चुपचाप बैठी रह, ज्यादा नखरे दिखाए तो याद रखना तेरा भाई अभी भी हमारे पास है," मामी ने मीरा के कान में फुसफुसाते हुए उसे धमकाया। मीरा ने अपनी नीची निगाहें नहीं उठाईं। वह जानती थी कि वह बेची जा चुकी है।
सामने बैठा दूल्हा, सूरज, शराब की बदबू से सराबोर था। उसकी आँखें लाल थीं और वह बार-बार अपनी नाक साफ कर रहा था। उस घर में कोई औरत नहीं थी, बस कुछ लफंगे दोस्त और सूरज के गुंडे किस्म के रिश्तेदार जो मीरा को भूखी नज़रों से देख रहे थे। मीरा के मामा, रमाकांत ने 1 करोड़ रुपये के बदले अपनी भांजी को इस नरक में धकेलने का सौदा किया था।
शादी की रस्में शुरू ही हुई थीं कि अचानक बाहर गाड़ियों के रुकने की भारी आवाजें आईं। एक नहीं, दो नहीं, बल्कि दर्जन भर गाड़ियाँ एक साथ रुकी थीं। पूरे मंडप में सन्नाटा पसर गया। पंडित के मंत्र पढ़ते होंठ रुक गए।
तभी, लोहे के भारी गेट को किसी ने जोर से लात मार कर खोला। धुआं और धूल उड़ी, और उस धुंधलके में से एक साया उभर कर आया।
अर्जुन 'सकार' शेखवत।
काले रंग का कुर्ता-पायजामा, गले में एक पतली सोने की चैन, कलाई पर महंगी घड़ी और आँखों में वो चमक जिसे देखकर मौत भी अपना रास्ता बदल ले। अर्जुन के पीछे उसके दस-बारह खासमखास आदमी थे, जिनके हाथों में हथियार साफ चमक रहे थे। अर्जुन का रुतबा ऐसा था कि उसके कदम रखते ही वहाँ मौजूद हर शख्स की सांसें अटक गईं। वो इस पूरे प्रदेश का बेताज बादशाह था। पुलिस उसकी जेब में थी और नेता उसके दरवाजे पर नाक रगड़ते थे।
अर्जुन बिना किसी हिचकिचाहट के मंडप की तरफ बढ़ा। उसके जूतों की आवाज़ 'टक-टक' पूरे सन्नाटे को चीर रही थी।
"रमाकांत..." अर्जुन की आवाज़ धीमी थी, लेकिन उसमें जो वजन था, उसने रमाकांत के पसीने छुड़ा दिए।
रमाकांत कांपते हुए खड़ा हुआ, "अ..अ..अर्जुन भाई? आप यहाँ? इस वक्त?"
अर्जुन ने पास पड़ी एक कुर्सी को अपनी तरफ खींचा और बड़े इत्मीनान से उस पर बैठ गया। उसने जेब से एक सिगार निकाला और उसे जलाया। धुएं का एक लंबा कश छोड़ते हुए उसने रमाकांत को देखा।
"आज तारीख पंद्रह है रमाकांत। मेरा कर्ज लौटाने का आखिरी दिन। पैसे कहाँ हैं?" अर्जुन ने बड़े ठंडे लहजे में पूछा।
रमाकांत के हाथ जुड़ गए, "भाई, बस दो घंटे... ये शादी हो जाने दीजिये, मुझे उधर से पैसे मिलने वाले हैं, मैं तुरंत आपका एक-एक पैसा सूद समेत चुका दूँगा। बस ये शादी..."
"शादी?" अर्जुन ने अपनी गर्दन घुमाई और पहली बार उसकी नज़र मीरा पर पड़ी।
मीरा ने अपनी आँखों का पर्दा थोड़ा ऊपर किया था। उसकी गीली आँखें और अर्जुन की ठंडी, बेरहम आँखें एक पल के लिए मिलीं। अर्जुन की नज़रों में एक अजीब सा ठहराव आ गया। उसने देखा कि मीरा एक गुड़िया की तरह वहाँ बैठी थी, जिसके चेहरे पर कोई उम्मीद नहीं थी। उसका चेहरा पीला पड़ा हुआ था, लेकिन उसकी खूबसूरती उस बदहाल स्थिति में भी चमक रही थी।
अर्जुन फिर रमाकांत की तरफ मुड़ा। "किसको बेचा है इसे?"
रमाकांत सकपका गया, "नहीं भाई, ये तो रिश्ता है..."
"झूठ मत बोल," अर्जुन की आवाज़ अब और भी गहरी हो गई थी। "ये सूरज? जो अपने बाप की कमाई शराब में उड़ा चुका है? इसके पास 1 करोड़ कहाँ से आए जो तुझे देगा?"
सूरज, जो नशे में था, लड़खड़ाते हुए खड़ा हुआ और बोला, "ए भाई, कौन है तू? हमारी शादी में दखल देने वाला? निकल यहाँ से!"
अर्जुन के एक इशारे पर उसके आदमी, 'टाइगर' ने सूरज के गले पर अपनी बंदूक की नली रख दी। सूरज की सारी नशा एक पल में उतर गई। वह थर-थर कांपने लगा।
अर्जुन खड़ा हुआ और धीरे-धीरे मीरा के करीब आया। मीरा ने डर के मारे अपनी आँखें बंद कर लीं। उसने सोचा था कि शायद यह नया आदमी और भी खतरनाक होगा।
"कितने पैसे लिए हैं तुमने इस लड़की के नाम पर?" अर्जुन ने रमाकांत के पास जाकर पूछा।
"भाई... वो... 1 करोड़ का सौदा हुआ है," रमाकांत ने हकबकाते हुए कहा।
अर्जुन ने एक फीकी मुस्कान दी। उसने अपने कोट की अंदरूनी जेब से एक चेक बुक निकाली और उस पर कुछ लिखा। उसने चेक फाड़ा और रमाकांत के चेहरे पर दे मारा।
"ये रहे 5 करोड़। अब ये लड़की मेरी हुई।"
पूरे मंडप में जैसे बम फूट गया हो। मामी चिल्लाई, "लेकिन हमने वचन दिया है, और सूरज के घर वालों ने पैसे..."
अर्जुन ने मामी की तरफ देखा तक नहीं। उसने बस अपना हाथ उठाया और सब खामोश हो गए। "वचन? यहाँ सिर्फ़ मेरा वचन चलता है। और मेरा वचन ये है कि ये शादी अब इस शराबी से नहीं, मुझसे होगी।"
मीरा ने चौंक कर अपना सिर उठाया। उसकी धड़कनें तेज़ हो गई थीं। एक पिंजरे से निकलकर वह दूसरे, और भी बड़े शिकारी के पिंजरे में जा रही थी।
सूरज के पिता ने हिम्मत जुटाकर कहा, "ये गैरकानूनी है! आप ऐसे किसी की बहू को नहीं ले जा सकते!"
अर्जुन हंसा। उसकी हंसी में कोई खुशी नहीं थी, सिर्फ खौफ था। "कानून? मैं इस राज्य का कानून हूँ। और जहाँ तक 'बहू' की बात है, तो अभी तक फेरे नहीं हुए हैं।"
उसने मीरा की तरफ अपना हाथ बढ़ाया। "खड़ी हो जाओ।"
मीरा हिली नहीं। वह सुन्न पड़ चुकी थी। अर्जुन को इंतज़ार करना पसंद नहीं था। उसने झुककर मीरा की कलाई पकड़ी। उसकी पकड़ लोहे जैसी मजबूत थी, लेकिन उसमें एक अजीब सी गर्माहट भी थी। उसने मीरा को एक झटके में खड़ा कर दिया।
"पंडित जी, मंत्र पढ़ना शुरू करो। अग्नि वही है, मंडप वही है, बस दूल्हा बदल गया है," अर्जुन ने आदेश दिया।
रमाकांत और मामी की हिम्मत नहीं हुई कि वे आगे बढ़ें। 5 करोड़ का चेक उनके सामने था, जो उनकी औकात से कहीं ज्यादा था। वे लालची थे, और अर्जुन ने उनकी कमजोरी को खरीद लिया था।
शादी शुरू हुई। कोई ढोल-नगाड़ा नहीं था, सिर्फ बंदूकों का पहरा था। अर्जुन ने मीरा के साथ फेरे लिए। मीरा को ऐसा लग रहा था जैसे वह किसी सपने में है—एक ऐसा सपना जहाँ से भागने का कोई रास्ता नहीं है। जब अर्जुन ने उसके गले में मंगलसूत्र बांधा, तो उसकी उंगलियां मीरा की गर्दन को छू गईं, जिससे मीरा के शरीर में एक सिहरन दौड़ गई।
फेरे पूरे होने के बाद, अर्जुन ने मीरा का हाथ कसकर पकड़ा और बाहर की तरफ बढ़ गया।
"मेरी बात याद रखना रमाकांत," अर्जुन गेट पर रुककर पीछे मुड़ा। "आज से ये मीरा शेखवत है। अगर तुम्हारी परछाईं भी इसके आस-पास दिखी, तो मैं तुम्हें उस ज़मीन में गाड़ दूँगा जहाँ से तुम्हारा नाम-निशान तक नहीं मिलेगा।"
बाहर बारिश शुरू हो गई थी। अर्जुन ने अपना काला कोट उतारकर मीरा के कंधों पर डाल दिया। उसे अपनी काली एसयूवी (SUV) की पिछली सीट पर बिठाया और खुद उसके बगल में बैठ गया।
गाड़ी तेज़ रफ़्तार से सड़कों पर दौड़ने लगी। मीरा खिड़की के बाहर देख रही थी, उसकी आंखों से आंसू अब भी गिर रहे थे।
"रोना बंद करो," अर्जुन की आवाज़ गाड़ी के भीतर गूंजी।
मीरा ने उसकी तरफ देखा। अर्जुन के चेहरे पर कोई पछतावा नहीं था, सिर्फ एक अधिकार था।
"आपने ऐसा क्यों किया? आप भी तो मुझे खरीद ही रहे हैं," मीरा ने अपनी कांपती आवाज़ में पहली बार कुछ कहा।
अर्जुन ने सिगार का धुआं छोड़ा और मीरा की तरफ झुक गया। उसके चेहरे और मीरा के चेहरे के बीच बस कुछ इंच का फासला था। मीरा को उसकी मर्दाना खुशबू और तंबाकू की महक महसूस हो रही थी।
"मैने तुम्हें खरीदा नहीं है मीरा, मैंने तुम्हें बचाया है। और बचाने की कीमत मैं वसूलना जानता हूँ," अर्जुन ने उसकी ठुड्डी को पकड़कर अपनी तरफ मोड़ा। "आज से तुम उस साम्राज्य की रानी हो, जिसका राजा मैं हूँ। नफरत करनी है तो जी भरकर करो, लेकिन अब तुम मेरी हो।"
गाड़ी शहर की रोशनी को पीछे छोड़ते हुए अर्जुन के उस आलीशान किले जैसे बंगले की तरफ बढ़ गई, जहाँ मीरा की एक नई और खतरनाक जिंदगी उसका इंतज़ार कर रही थी।
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