विक्रम कुर्सी पर जमा बैठा था, उसकी आँखों में हवस की सुर्ख लाल लकीरें उभर आई थीं। रिया ने एक गहरी और मादक मुस्कान दी और अपने जिस्म को लहराते हुए विक्रम के चेहरे के बिल्कुल करीब ले आई। उसने अपना एक पैर विक्रम की कुर्सी के हत्थे पर रखा और अपनी नग्न जांघों को पूरी तरह फैला दिया।
अब रिया की वह गीली और गुलाबी 'पुसी' (Pussy) विक्रम की नाक के बिल्कुल सामने थी। कमरे की मद्धम रोशनी में वहां की नमी और ताजगी साफ चमक रही थी।







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