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Chapter 2 college and jealousy

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prachi76011

नाश्ते की मेज से उठने के बाद घर के सन्नाटे में एक अजीब सी हलचल महसूस हो रही थी। आर्यन ने अपनी घड़ी देखी, साढ़े आठ बज चुके थे। उसने मेज से अपनी कार की चाबियाँ उठाईं और एक गहरी सांस लेकर आराध्या की ओर देखा, जो अभी भी अपने विचारों में खोई हुई थी।

"चलो प्रिंसेस, आज ड्राइविंग सीट मेरी है। देखते हैं तुम्हारी फेवरेट स्पोर्ट्स कार आज कितनी रफ्तार पकड़ती है," आर्यन ने शरारत से अपनी आँखों को सिकोड़ते हुए कहा।

आराध्या के चेहरे पर एक फीकी मुस्कान आई। वह उठी और अपना बैग कंधे पर लटका लिया। दोनों घर के विशाल बरामदे से होते हुए गैरेज की तरफ बढ़े। वहाँ खड़ी थी आर्यन की शान—एक चमचमाती हुई 'मैट ब्लैक' स्पोर्ट्स कार। उसकी बनावट और इंजन की गड़गड़ाहट किसी शिकारी चीते जैसी थी। आर्यन ने दरवाज़ा खोला और आराध्या को बैठने का इशारा किया। जैसे ही वे कार में बैठे, आर्यन ने इंजन स्टार्ट किया। एक तेज़ गूंज के साथ कार सड़क पर दौड़ पड़ी।

आर्यन MBA फाइनल ईयर का छात्र था, और आराध्या BBA फाइनल ईयर में। दोनों का कॉलेज एक ही था, लेकिन उनकी दुनिया और उनके विभाग अलग थे। रास्ते भर कार में सॉफ्ट म्यूजिक बज रहा था, लेकिन आराध्या का ध्यान गानों पर कम और ड्राइविंग करते हुए आर्यन के हाथों की नसों पर ज़्यादा था। स्टीयरिंग व्हील पर उसकी पकड़, उसकी एकाग्रता और वो गंभीर चेहरा—आराध्या को हर चीज़ सम्मोहित कर रही थी।

जैसे ही स्पोर्ट्स कार कॉलेज के विशाल गेट के अंदर दाखिल हुई, सबकी निगाहें उसी ओर टिक गईं। आर्यन की लोकप्रियता कॉलेज में किसी सेलिब्रिटी से कम नहीं थी। उसने कार पार्क की और जैसे ही दोनों बाहर निकले, लड़कियों की दबी-कुचली सुगबुगाहट शुरू हो गई।

अभी वे सीढ़ियों की तरफ बढ़ ही रहे थे कि पीछे से एक तेज़ और चहकती हुई आवाज़ आई, "आर्यन! ओ माय गॉड, आर्यन!"

आराध्या के माथे पर सिलवटें पड़ गईं। उसने मुड़कर देखा, तो सामने से निशा भागती हुई आ रही थी। निशा उनके फैमिली फ्रेंड की बेटी थी, जो बचपन से ही आर्यन के पीछे हाथ धोकर पड़ी थी। उसने शॉर्ट ड्रेस पहनी थी और भारी मेकअप के साथ वह किसी भी तरह आर्यन का ध्यान खींचने की कोशिश कर रही थी।

"आर्यन, तुम कल फोन क्यों नहीं उठा रहे थे? तुम्हें पता है मैंने कितना इंतज़ार किया!" निशा ने आते ही आर्यन के हाथ को पकड़ने की कोशिश की और लगभग उसके चिपकने लगी।

आर्यन के चेहरे पर एक असहज मुस्कान आई। वह निशा को पसंद नहीं करता था, लेकिन पारिवारिक रिश्तों की वजह से वह उसे ज़ोर से झिड़क भी नहीं सकता था। उसने बड़ी चतुराई से अपना हाथ पीछे खींचा और थोड़ा पीछे हट गया।

"निशा, मैं बिज़ी था। मॉम-डैड बाहर हैं तो घर की ज़िम्मेदारियाँ मुझ पर हैं," आर्यन ने बहुत ही ठंडे लहजे में कहा, जिसे नज़रअंदाज़ (ignore) करना साफ झलक रहा था।

लेकिन निशा कहाँ मानने वाली थी। "ओह कम ऑन! ज़िम्मेदारियाँ तो चलती रहेंगी। आज शाम को मेरा एक छोटा सा गेट-टुगेदर है, तुम्हें आना ही होगा।"

आराध्या बगल में खड़ी थी और उसका खून खौल रहा था। उसे ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसके कीमती खजाने पर हाथ डाल रहा हो। वह मन ही मन निशा को कोसने लगी। 'चुड़ैल कहीं की! क्या ज़रूरत है इतना चिपकने की? मेकअप की दुकान लग रही है पूरी। शकल देखी है अपनी? भैया तुझे घास भी नहीं डालेंगे, पर तुझे तो बस बेइज्जती करानी है।'

आराध्या की मुट्ठियाँ भिंच गई थीं। उसकी जलन उसकी आँखों में साफ झलक रही थी, लेकिन वह खामोश रही। उसे डर था कि कहीं उसकी नफरत उसके राज़ को ज़ाहिर न कर दे।

आर्यन ने आराध्या की हालत भाँप ली थी। उसने निशा की बात काटते हुए कहा, "देखते हैं निशा, अभी क्लास का टाइम हो रहा है। चलो आराध्या।"

उसने निशा को वहीं खड़ा छोड़ दिया और आराध्या को लेकर आगे बढ़ गया। निशा का चेहरा उतर गया था, लेकिन आराध्या के दिल को थोड़ी ठंडक मिली। फिर भी, वह अंदर ही अंदर अभी भी निशा को 'गंदी गालियाँ' दे रही थी।

आर्यन, आराध्या को उसके ब्लॉक तक छोड़ने आया। "अपनी क्लास ध्यान से अटेंड करना। कोई दिक्कत हो तो बस एक मैसेज कर देना, ठीक है?" उसने आराध्या के सिर पर हाथ रखा।

"जी भैया," आराध्या ने धीरे से कहा। आर्यन उसे छोड़कर अपने विभाग (MBA ब्लॉक) की तरफ बढ़ गया।

जैसे ही आराध्या अपनी क्लास में दाखिल हुई, उसकी सबसे अच्छी सहेली रिया उसके पास दौड़ती हुई आई।

"ओए होए! आज तो बड़ी ग्लो कर रही है। क्या बात है? भाई के साथ स्पोर्ट्स कार में एंट्री... पूरा कॉलेज बस तुम दोनों को ही देख रहा था," रिया ने मज़ाक करते हुए कहा।

आराध्या ने बैग बेंच पर रखा और गहरी सांस ली। "कुछ नहीं यार, बस वही रोज़ का ड्रामा। वो निशा मिल गई थी गेट पर, मूड खराब कर दिया उसने।"

रिया हंसने लगी। "अरे यार, तू क्यों जलती है उससे? सबको पता है आर्यन भाई उसे भाव नहीं देते। पर सच कहूँ तो, आर्यन भाई जैसा बंदा अगर मेरा भाई होता, तो मैं तो घर से बाहर ही नहीं निकलने देती उन्हें।"

आराध्या ने रिया की तरफ एक तीखी नज़र डाली। "चुप कर रिया! क्लास शुरू होने वाली है।"

तभी प्रोफेसर क्लास में दाखिल हुए और सब शांत हो गए। आराध्या ने अपनी नोटबुक खोली, लेकिन उसका मन ब्लैकबोर्ड पर लिखे शब्दों में नहीं, बल्कि आर्यन में अटका था।

उधर, MBA ब्लॉक के क्लासरूम में नज़ारा बिल्कुल अलग था। आर्यन सबसे पीछे वाली बेंच पर बैठा था। यहाँ वह वो 'प्यारा भैया' नहीं था जो सुबह अपनी बहन को दुलार से जगा रहा था।

यहाँ उसका Aura (आभामंडल) बिल्कुल अलग था—गंभीर, शक्तिशाली और थोड़ा डरावना। उसने अपनी बाहें सीने पर बाँध रखी थीं। उसकी ब्लैक शर्ट उसके व्यक्तित्व को और भी रौबीला बना रही थी। पूरी क्लास में एक अजीब सा सन्नाटा था जब वह वहाँ बैठा होता था। यहाँ तक कि प्रोफेसर भी उससे बात करते वक्त थोड़ा संभल कर रहते थे।

आर्यन की पहचान यहाँ एक होनहार लेकिन 'रिजर्व्ड' छात्र की थी। वह कम बोलता था, लेकिन जब बोलता था, तो उसकी बात में वजन होता था। लड़कियाँ उसे दूर से देखती थीं, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं थी कि वह पास आकर उससे फालतू बात कर सके—सिवाय निशा जैसे कुछ लोगों के, जिन्हें वह पारिवारिक मजबूरी में झेलता था।

आर्यन खिड़की से बाहर देख रहा था। उसके दिमाग में बिज़नेस की डील और घर की सुरक्षा के विचार चल रहे थे। वह जानता था कि माँ-बाप की अनुपस्थिति में उसे एक मज़बूत दीवार बनकर खड़ा रहना है। लेकिन उसे यह अहसास नहीं था कि जिस 'दीवार' के पीछे वह आराध्या को सुरक्षित रखना चाहता है, उसी दीवार के साये में आराध्या का दिल उसके लिए बागी होता जा रहा है।

क्लास चल रही थी, प्रोफेसर लेक्चर दे रहे थे, लेकिन दो अलग कमरों में बैठे दो भाई-बहन, दो अलग-अलग तूफानों से गुज़र रहे थे। एक के पास ज़िम्मेदारियों का बोझ था, और दूसरे के पास एक ऐसी मोहब्बत का बोझ, जिसे वह न उगल सकती थी और न ही निगल सकती थी।

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