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Chapter 5 khamoshi aur 2 tute huye dil

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रात भर आसमान से पानी नहीं, बल्कि आग बरस रही थी—कम से कम आर्यन को तो ऐसा ही महसूस हो रहा था। अपने कमरे के बंद दरवाज़े के पीछे, वह फर्श पर टेक लगाकर बैठा था। आईने में अपनी सूरत देखने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी। आराध्या के वे शब्द उसके कान में किसी ज़हरीले तीर की तरह चुभ रहे थे—"मुझे आपके लिए वो महसूस नहीं होता जो एक बहन को भाई के लिए होना चाहिए।"

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