कमरे की नीली रोशनी उन दोनों के अर्ध-निर्वस्त्र शरीरों पर एक रहस्यमयी चमक बिखेर रही थी। वातावरण इतना बोझिल और उत्तेजक हो चुका था कि हवा में भी एक अजीब सी खुशबू और गर्मी महसूस हो रही थी। आर्यन और आराध्या अब केवल दो जिस्म नहीं रह गए थे; वे एक-दूसरे की बरसों की दबी हुई प्यास का ठिकाना बन चुके थे।
आर्यन का सीना धौंकनी की तरह चल रहा था। उसका हाथ, जो आराध्या के रेशमी बदन पर रेंग रहा था, अब और भी बेताब हो चुका था। आराध्या के उभारों (Boobs) को अपने होठों से सहलाने के बाद जब वह ऊपर उठा, तो उसकी आँखों में एक ऐसी वहशीियत और चमक थी जिसे देखकर आराध्या का पूरा वजूद कांप उठा।







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