कमरे के भीतर की हवा अभी भी उस जुनून की गर्मी से भरी हुई थी जो कुछ देर पहले अपनी चरम सीमा पर था। घड़ी की टिक-टिक अब साफ़ सुनाई दे रही थी, जो याद दिला रही थी कि वक्त गुज़र रहा है और सुबह करीब है। बिस्तर पर आर्यन और आराध्या पूरी तरह निर्वस्त्र (Naked) एक-दूसरे के जिस्म से चिपके हुए लेटे थे।
आराध्या का सिर आर्यन की चौड़ी और पसीने से भीगी छाती पर था। आर्यन का एक हाथ आराध्या की रेशमी कमर को घेरे हुए था, जैसे वह उसे दुनिया के हर खतरे से बचा लेना चाहता हो। लेकिन उस शारीरिक सुकून के बीच, आराध्या के मन में एक गहरा डर घर करने लगा था। सन्नाटे में उसे बगल वाले कमरे से आने वाली आहटें अब डरावनी लग रही थीं।







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