भोर की पहली किरण अभी खिड़की के पर्दों से झाँकने ही वाली थी कि आर्यन की आँख खुल गई। कमरे में अभी भी वही हल्की नीली रोशनी थी जिसमें आराध्या का मासूम चेहरा चमक रहा था। वह आर्यन के सीने से लगकर किसी छोटे बच्चे की तरह सोई थी। आर्यन ने उसे निहारा और फिर धीरे से दीवार पर लगी घड़ी देखी।
5:30 बज रहे थे। घर के नौकर और उसके माता-पिता किसी भी वक्त जाग सकते थे। अगर आराध्या को इस वक्त उसके कमरे में देख लिया गया, तो सब कुछ खत्म हो जाएगा।







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