फार्महाउस के हॉल में जल रही मोमबत्तियाँ अब अपने अंतिम पड़ाव पर थीं, उनकी लौ मद्धम पड़ रही थी, जिससे कमरे में एक रहस्यमयी और गहरा धुंधलका छा गया था। पहले मिलन के बाद का वह ठहराव अब फिर से एक नई लहर में बदल रहा था। आर्यन और आराध्या के जिस्म एक-दूसरे की गर्मी से अभी भी दहक रहे थे। पसीने की बूंदें उनके बदन पर चांदनी की तरह चमक रही थीं।
आर्यन ने आराध्या की आँखों में देखा, जो थकान और बेइंतहा सुख से आधी बंद थीं। लेकिन उन आँखों में अभी भी एक अनबुझी प्यास बाकी थी। आर्यन उसे सिर्फ शारीरिक सुख नहीं देना चाहता था, वह उसे उस हर अनुभव से रूबरू कराना चाहता था जिसे उन्होंने समाज के डर से अब तक दबा रखा था।







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