फार्महाउस की ऊँची कांच की खिड़कियों से छनकर आती सुबह की पहली सुनहरी किरण ने कमरे के सन्नाटे को तोड़ा। कल रात का वह तूफान अब शांत था, लेकिन उसकी निशानियां पूरे कमरे में बिखरी हुई थीं। फर्श पर पड़े उनके कपड़े, कुचली हुई गुलाब की पंक्तियाँ और उस विशेष सोफे पर पड़ी सिलवटें—सब उस वर्जित मिलन की गवाही दे रहे थे।
बिस्तर के विशाल गद्दे पर आर्यन और आराध्या पूरी तरह नग्न (Naked) एक-दूसरे में उलझे हुए सो रहे थे। उनके जिस्मों के बीच कोई पर्दा नहीं था, केवल एक पतली रेशमी चादर थी जो आधी उनके पैरों के पास गिरी हुई थी। आर्यन की गठीली बाहें आराध्या की कमर को घेरे हुए थीं, और आराध्या का सिर उसके सीने पर था।







Write a comment ...