यूनिवर्सिटी के गलियारों में अभी भी शौर्य प्रताप सिंह की उस रोल्स रॉयस के टायरों की चीख गूँज रही थी। अद्रिका अपनी क्लास खत्म कर अपने छोटे से केबिन की ओर बढ़ी। उसके दिल की धड़कनें अभी भी सामान्य नहीं हुई थीं। एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की के लिए मुख्यमंत्री के बेटे से सीधी टक्कर लेना किसी मौत के वारंट पर साइन करने जैसा था।
अद्रिका ने अपने केबिन का दरवाज़ा अंदर से बंद किया और कुर्सी पर ढह गई। उसने अपने कांपते हाथों से पानी का गिलास उठाया। गुस्से और खौफ का एक मिला-जुला सैलाब उसके अंदर उमड़ रहा था।
"बदतमीज़... जाहिल इंसान! उसे लगता है कि पैसा और पावर उसे खुदा बना देते हैं," अद्रिका ने दांत पीसते हुए फुसफुसाया। "शौर्य प्रताप सिंह... नाम बड़ा और दर्शन छोटे। बाप की जागीर समझ रखी है इस यूनिवर्सिटी को। अगर उसे लगता है कि मैं डर कर इस्तीफा दे दूँगी, तो उसने गलत लड़की से पंगा लिया है।"
वह अभी खुद को संभाल ही रही थी कि अचानक केबिन के बाहर से शोर-शराबे और चीखने की आवाज़ें आने लगीं। ऐसा लग रहा था जैसे कोई बुरी तरह पिट रहा हो। अद्रिका झटके से खड़ी हुई और खिड़की से बाहर देखा।
यूनिवर्सिटी के मुख्य लॉन में भीड़ जमा थी। बीचों-बीच शौर्य प्रताप सिंह खड़ा था, उसके सफेद शर्ट के कफ ऊपर चढ़े हुए थे और चेहरे पर एक वहशी मुस्कान थी। उसके पैरों के पास एक दुबला-पतला छात्र, जिसका नाम 'आर्यन' था, खून से लथपथ पड़ा था।
शौर्य ने आर्यन के कॉलर को पकड़कर उसे ऊपर उठाया और एक ज़ोरदार मुक्का उसके जबड़े पर जड़ा। आर्यन का सिर पीछे की ओर झटका खाया और वह फिर से ज़मीन पर गिर पड़ा। शौर्य ने बिना किसी रहम के अपने भारी बूट से आर्यन के हाथ पर प्रहार किया।
"मेरी कार को छूने की हिम्मत कैसे हुई तेरी? स्क्रैच देखा है उस पर? तेरी पूरी खानदान की कीमत भी उस एक स्क्रैच के बराबर नहीं है," शौर्य की आवाज़ में वह ठंडा अहंकार था जो किसी की भी रूह कँपा दे।
अद्रिका यह सब देख रही थी। उसका खून खौल उठा। वह बिना सोचे-समझे केबिन से बाहर निकली और भीड़ को चीरती हुई बीच मैदान में पहुँच गई।
"रुक जाइये शौर्य! बस कीजिये!" अद्रिका चिल्लाई।
शौर्य आर्यन को फिर से मारने के लिए अपना पैर उठा ही रहा था कि अद्रिका उसके और आर्यन के बीच आकर खड़ी हो गई। शौर्य रुका, उसने अपनी आँखों से काला चश्मा हटाया और एक तिरछी नज़रों से अद्रिका को देखा।
"ओह... हमारी प्रोफेसर साहिबा। फिर से लेक्चर देने आ गई? हट जाइये यहाँ से, वरना इस लड़के के साथ-साथ आपको भी चोट लग सकती है," शौर्य ने एक लापरवाह अंदाज़ में कहा।
"आप एक इंसान को मार रहे हैं! क्या आपको कानून का ज़रा भी डर नहीं है?" अद्रिका ने हाँफते हुए आर्यन को उठाने की कोशिश की।
शौर्य ने आर्यन को फिर से लात मारनी चाही, "कानून मेरे घर की दासी है, मैडम।"
अद्रिका का धैर्य अब जवाब दे गया। जैसे ही शौर्य आर्यन को मारने के लिए आगे बढ़ा, अद्रिका ने अपनी पूरी ताकत समेटकर अपना हाथ हवा में लहराया और...
'चटाख!'
पूरे यूनिवर्सिटी परिसर में एक सन्नाटा छा गया। हवा जैसे थम गई। हज़ारों छात्रों और बॉडीगार्ड्स के सामने, एक मामूली प्रोफेसर ने सूबे के मुख्यमंत्री के इकलौते बेटे, एशिया के सबसे बड़े बिजनेस टाइकून के वारिस—शौर्य प्रताप सिंह के चेहरे पर एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया था।
शौर्य का चेहरा एक तरफ झुक गया। उसकी आँखों के सामने जैसे सितारे नाचने लगे। उसके गाल पर अद्रिका की उंगलियों के पाँच लाल निशान साफ़ उभर आए थे। बॉडीगार्ड्स ने अपनी गन निकालने की कोशिश की, लेकिन शौर्य ने हाथ उठाकर उन्हें रोक दिया।
शौर्य ने धीरे-धीरे अपना चेहरा सीधा किया। उसकी आँखों में गुस्सा नहीं था, बल्कि एक ऐसी खामोशी थी जो किसी बड़ी तबाही का संकेत दे रही थी। उसने अपनी जुबान से अपने होंठ के किनारे लगे खून को चाटा और अद्रिका की ओर एक कदम बढ़ाया।
भीड़ पीछे हट गई। अद्रिका का दिल तेज़ी से धड़क रहा था, लेकिन वह डरी नहीं। उसने अपनी नज़रें नीची नहीं कीं।
शौर्य अद्रिका के इतना करीब आया कि उसकी नाक अद्रिका के माथे को छूने लगी। उसने बहुत धीमी, ठंडी और डरावनी आवाज़ में कहा, "आज आपने वो कर दिया जो इस दुनिया में किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। आपने शौर्य प्रताप सिंह पर हाथ उठाया है।"
उसने अद्रिका के कान के पास झुककर अपनी आखिरी चेतावनी दी, "ये थप्पड़... ये आपकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी गलती साबित होगा। अब तक मैं सिर्फ आपको झुकाना चाहता था, लेकिन अब मैं आपको बर्बाद करूँगा। याद रखिये अद्रिका, आपने शेर की पूंछ पर पैर रखा है। अब शिकार शुरू होगा। आज रात अपनी नींद पूरी कर लीजिये, क्योंकि कल से आपकी रातों की नींद और दिन का चैन, दोनों मेरा होगा।"
शौर्य ने अपनी शर्ट के कफ ठीक किए, अपनी कार की चाबी घुमाई और बिना पीछे मुड़े अपनी रोल्स रॉयस की ओर बढ़ गया। उसके जाने के बाद भी यूनिवर्सिटी का माहौल ऐसा था जैसे वहाँ कोई बम फटा हो।
अद्रिका वहीं खड़ी रही। उसे अहसास था कि उसने आग से खेल लिया है। अब शौर्य प्रताप सिंह का अहंकार नहीं, उसका वहशी जुनून बोलेगा।
Guys mene The girl with three husbands season 2 start kar di hai . And aur bhi novel daily chapter upload karne ki kosish kar rahi hu. Unhe bhi apna support jarur de .
Comments and like karna mat bhulna .Aur follow bhi kar lijiyega 🤗.







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