यूनिवर्सिटी की कैंटीन में दोपहर की उमस और समोसों की महक के बीच छात्रों का शोर हमेशा की तरह चरम पर था। लेकिन एक कोने की टेबल पर सन्नाटा पसरा हुआ था। वहाँ राज्य का सबसे शक्तिशाली वारिस, शौर्य प्रताप सिंह, अकेला बैठा था। उसके सामने ब्लैक कॉफी का एक कप रखा था जिससे धुआं उठ रहा था, और उसकी उंगलियों के बीच फंसी सिगरेट धीरे-धीरे राख में बदल रही थी। शौर्य की आँखें स्थिर थीं, जैसे वह किसी गहरे और खूनी विचार में डूबा हो।
तभी पास वाली टेबल पर चार-पांच लड़कों का एक ग्रुप बैठा, जो शहर के रईस परिवारों से ताल्लुक रखते थे, लेकिन शौर्य के रसूख के सामने वे कुछ भी नहीं थे। वे लड़के अपनी मस्ती में चूर थे और उनकी बातचीत का विषय धीरे-धीरे उस ओर मुड़ गया जो शौर्य के लिए अब एक 'वर्जित क्षेत्र' बन चुका था।







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