हाईवे पर धधकती हुई आग की लपटें शौर्य के चेहरे पर एक डरावनी लालक छोड़ गई थीं, लेकिन उस खून और बारूद की गंध ने भी उसके अंदर की आग को शांत नहीं किया था। अपनी रोल्स रॉयस की स्टेयरिंग व्हील को इतनी सख़्ती से जकड़े हुए कि उसकी उंगलियों के जोड़ सफेद पड़ गए थे, शौर्य शहर की सड़कों पर काल बनकर दौड़ रहा था। उसके कानों में अभी भी उन लड़कों की वह घटिया बातें गूँज रही थीं जो उन्होंने अद्रिका के जिस्म को लेकर की थीं।
अद्रिका... उसकी प्रोफेसर, उसकी होने वाली बीवी, उसकी सबसे कीमती 'जागीर'। किसी और की हिम्मत कैसे हुई उसे अपनी गंदी नज़रों से देखने की?







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