कॉलेज का समय खत्म हो चुका था। गलियारों में सन्नाटा पसरने लगा था, लेकिन प्रोफेसर सतीश के केबिन की बत्तियाँ अभी भी जल रही थीं। केबिन के भीतर सन्नाटा और तनाव दोनों अपनी चरम सीमा पर थे। प्रोफेसर सतीश अपनी भारी कुर्सी पर बैठे हुए थे और उनके सामने उनकी स्टूडेंट, तान्या, खड़ी थी। उसकी आँखों में आंसू थे और हाथों में उसकी कम नंबरों वाली मार्कशीट।
"सर, प्लीज ऐसा मत कीजिए। अगर मैं इस सेमेस्टर में फेल हो गई, तो मेरा पूरा साल बर्बाद हो जाएगा। मेरे घरवाले मुझे कॉलेज से निकाल देंगे," तान्या ने रोते हुए अपनी आवाज़ को जितना हो सके बेबस बनाने की कोशिश की।














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