रात के उस मखमली तूफ़ान के बाद जब खन्ना हाउस की खिड़कियों से सुबह की पहली सुनहरी किरण अंदर दाखिल हुई, तो कमरे का नज़ारा किसी शांत झील जैसा था। बिस्तर पर बिखरी रजाई और एक-दूसरे की बाहों में सिमटे आर्यन और आराध्या की गहरी सांसें उस सुकून की गवाह थीं, जो उन्होंने सालों की तड़प के बाद पाया था।
आर्यन की आँखें पहले खुलीं। उसने अपने पास सोई हुई आराध्या को देखा। उसके चेहरे पर बिखरी लटें और उसकी गुलाबी रंगत कल रात के उस 'अडॉप्टेड' होने के सच और उसके बाद के उस रूहानी मिलन की कहानी कह रही थीं। आर्यन के होंठों पर एक गहरी मुस्कान आ गई। आज उसे वह बोझ महसूस नहीं हो रहा था जो उसे हर सुबह डराता था। आज वह आज़ाद था।













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