सुबह की पहली किरण जब खिड़की के भारी पर्दों को चीरकर अंदर आई, तो कमरा कल रात के बिखराव की गवाही दे रहा था। बेड पर नूर बीच में बेसुध सोई थी, उसका शरीर चादर से आधा ढका हुआ था, और उसके दोनों ओर शिवांश और अध्यक्ष गहरी नींद में निढाल पड़े थे। कमरे में अभी भी उस जंगली जुनून की गंध बाकी थी।
तभी कमरे का दरवाजा एक झटके से खुला। अखंड अंदर दाखिल हुआ। उसके चेहरे पर कठोरता थी और आँखों में एक ठंडी आग। उसने कमरे के नजारे को देखा—फर्श पर फटे हुए कपड़े, उलझी हुई चादरें और सबसे बढ़कर, नूर के सफेद कंधों और गर्दन पर दिख रहे नीले और लाल दांतों के निशान (Bite Marks)।













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