हॉस्टल की बंदिशों और रोज़-रोज़ की वही उबाऊ जिंदगी से दूर, आस्था आज भारी मन से अपने नए घर की दहलीज़ पर खड़ी थी। उसकी माँ ने कुछ ही समय पहले अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करते हुए एक दूसरे अमीर आदमी से शादी की थी। आस्था के लिए यह सब कुछ बहुत अजीब था। उसे पता चला था कि उसके सौतेले पिता का एक बेटा भी है, जो उम्र में उससे बड़ा है।
जैसे ही उसने घर के अंदर कदम रखा, उसकी माँ ने दौड़कर उसे गले से लगा लिया। "कैसी है मेरी बच्ची? देख, यह अब से तेरा भी घर है," माँ ने उसके गालों को चूमते हुए कहा।














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