शहर का शोर अब बहुत पीछे छूट चुका था। उस ऊंचे टीले पर खड़ी आर्यन की काली कार चांदनी की दूधिया रोशनी में किसी सोए हुए शिकारी जैसी लग रही थी। चारों तरफ केवल झींगुरों की आवाज़ और ठंडी हवा की सरसराहट थी जो पेड़ों के पत्तों से टकराकर एक रहस्यमयी संगीत पैदा कर रही थी। गाड़ी के भीतर का एसी (AC) मद्धम चल रहा था, जिससे केबिन का तापमान बाहर की गर्मी से बिल्कुल अलग और सुखद था।
आराध्या अभी भी आर्यन के कंधे पर सिर रखे हुए थी। उसकी आँखें बंद थीं, पर उसकी साँसें अब भी थोड़ी तेज़ थीं—जैसे वह अभी भी दफ्तर की उन फाइलों और मिसेज डिसूजा की कड़वी बातों से भागने की कोशिश कर रही हो।













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