कमरे के भीतर की हवा अभी भी उस प्रचंड और आदिम जुनून की गवाही दे रही थी जो कुछ ही देर पहले शांत हुआ था। मलिक साम्राज्य के वारिस ने जाने से पहले अपनी रानी के शरीर और रूह पर अपना नाम इस तरह लिख दिया था कि अब उसे मिटाना नामुमकिन था। संभोग की उस अत्यधिक थकावट और अद्वैत के बेपनाह, भारी प्यार के कारण सिया की आँखें भारी हो चुकी थीं। वह बिस्तर की मखमली चादरों के बीच अधमूंदी आँखों से अद्वैत के चेहरे को देख रही थी, और कुछ ही पलों में वह एक गहरी, बेखबर नींद के आगोश में समा गई (Fell into a deep sleep)।
अद्वैत बेड के किनारे बैठा अपनी हांफती हुई सांसों को पूरी तरह शांत कर रहा था। उसने मुड़कर बिस्तर पर सोई हुई सिया की मासूमियत को देखा, जिसके चेहरे पर अभी भी उस चरम सुख की लाली बिखरी हुई थी। घड़ी की सुइयाँ टिक-टिक करते हुए आगे बढ़ रही थीं, और अद्वैत को अब कबीर के मिशन के लिए निकलना था। उसके पास वक्त बहुत कम था।













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