हवेली के कमरे में दोपहर की खामोशी पसरी हुई थी, जो रात के उस शोर और जुनून के बाद एक सुकून भरी राहत की तरह थी। मीरा अर्जुन की सफेद शर्ट पहने बिस्तर पर अर्धलेटी अवस्था में थी। शर्ट के खुले कॉलर से उसकी गर्दन पर अर्जुन के दांतों के निशान साफ चमक रहे थे, जो किसी कीमती जेवर से कहीं ज्यादा गहरे और असली लग रहे थे।
कमरे का दरवाजा धीरे से खुला और अर्जुन अंदर दाखिल हुआ। उसके एक हाथ में खाने की ट्रे थी। इस खूंखार शख्स को, जिसके सामने बड़े-बड़े मुजरिम घुटने टेक देते थे, अपनी पत्नी के लिए खाना लाते देखना किसी अजूबे से कम नहीं था। उसने ट्रे को मेज पर रखा और मीरा के पास बेड पर बैठ गया।














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