पिंकी के घर की वह बदबूदार कोठरी और उस घिनौने मंजर के बाद, हवेली का माहौल आज फिर से अर्जुन की दबंगई और मीरा के प्रति उसके गहरे, आदिम लगाव में भीगा हुआ था। अर्जुन जानता था कि मीरा अंदर से अपनी बहन के व्यवहार से टूटी हुई है, और वह अपनी 'मलिका' का ध्यान भटकाने के लिए उसे उस दुनिया की सैर कराना चाहता था जहाँ सिर्फ उसका हुक्म चलता था।
सुबह के दस बज रहे थे। अर्जुन ने अपनी काली जीप निकाली और मीरा को तैयार होने के लिए कहा। शहर के सबसे महंगे और खास इलाके में, जहाँ आम आदमी कदम रखने से पहले अपनी जेब देखता था, वहाँ अर्जुन शेखवत का नाम ही काफी था।














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