हवेली की भारी खामोशी को चीरती हुई रात अपनी ढलान पर थी, लेकिन अर्जुन और मीरा के कमरे के भीतर की तपिश अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुकी थी। बिस्तर की चादरें पहले से ही अस्त-व्यस्त थीं, और कमरे की हवा में पसीने और हवस की एक सोंधी गंध घुली हुई थी। अर्जुन ने अभी-अभी मीरा को अपने मुँह से तृप्त किया था, लेकिन उसकी आँखों की भूखी चमक बता रही थी कि उसका असली खेल तो अभी शुरू होना बाकी है।
अर्जुन ने मीरा को बिस्तर के बीचों-बीच खड़ा किया। चाँदनी की मद्धम रोशनी मीरा के उन सुडौल कूल्हों पर पड़ रही थी, जिन पर अभी भी अर्जुन की उंगलियों के लाल निशान उभरे हुए थे। अर्जुन ने मीरा को पीछे से अपनी बाहों में भरा और उसके कान के पास झुककर अपनी भारी और अत्यधिक बोल्ड आवाज़ में फुसफुसाया।














Write a comment ...