सिंघानिया मैंशन के उस विशाल सुइट के भीतर की हवा आज किसी अदृश्य अग्नि से दहक रही थी। कमरे के भारी मखमली परदे आधी बंद थीं, जिनसे छनकर आती हुई सुनहरी रोशनी फर्श पर बिछे ईरानी कालीन को चूम रही थी। एसी की हल्की सरसराहट के बीच सिर्फ दो दिलों की तेज़ होती धड़कनें सुनाई दे रही थीं। कमरे का तापमान वैसे तो काफी कम था, लेकिन अयान और आरोही के बीच जो तपिश बढ़ रही थी, उसने उस ठंडी हवा को भी पूरी तरह से अपनी लपेट में ले लिया था।
अयान ने आरोही को अपनी मज़बूत बाहों में इस तरह जकड़ रखा था जैसे वह उसे दुनिया के हर साये से छुपा लेना चाहता हो। उसका पिछला गुस्सा, जो किसी ज्वालामुखी की तरह खौल रहा था, अब एक गहरे, बेपनाह जुनून में तब्दील हो चुका था। वह उसे खोने के डर से कांप रहा था, और यही डर अब एक भयंकर हवस और प्यार का मिला-जुला रूप ले चुका था। उसने बिना एक पल गंवाए अपना भारी चेहरा झुकाया और आरोही के रसीले, गुलाबी होंठों पर अपना पूरा अधिकार जमा लिया।













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