बालकनी की ठंडी और उदास हवा से निकलकर जब आर्यन और सिया बेडरूम के मद्धम पीले उजाले में वापस आए, तो कमरे का सन्नाटा जैसे किसी नए मोड़ की गवाही दे रहा था। साइड टेबल पर रखी चीनी मिट्टी की ट्रे में खाना अब थोड़ा ठंडा हो चुका था, लेकिन उसकी सोंधी खुशबू हवा में घुली हुई थी।
आर्यन चुपचाप बेड के किनारे बैठ गया। उसके चेहरे पर अभी भी बच्चों की कही बातों का एक गहरा दर्द साफ दिख रहा था, लेकिन सिया के शब्दों ने उसके जख्मी दिल पर मरहम का काम किया था। सिया ने बिना कुछ बोले ट्रे उठाई और उसे आर्यन के पास मेज़ पर रख दिया। उसने प्लेट से निवाला तोड़ा, सब्जी लगाई और बहुत ही कोमलता से अपना हाथ आगे बढ़ाकर निवाला आर्यन के होठों के करीब ले गई।


















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