मलिक हवेली के मास्टर बेडरूम की छत पर जहाँ सिया और उसके तीनों पतियों के बीच का तूफ़ान शांत होकर एक गहरे, पुरसुकून सन्नाटे में बदल चुका था, वहीं हवेली के दूसरे छोर पर कबीर मल्होत्रा के विंग और मायरा के बेडरूम के बीच की हवा में बारूद घुला हुआ था। कबीर रात के अंधेरे में अपने हाथ से बना हुआ गरमा-गरम पास्ता लेकर मायरा के कमरे की तरफ बढ़ रहा था। उसके दिमाग में अभी भी मायरा की वो चुनौती गूँज रही थी—"अगर बॉयफ्रेंड बनना है, तो थोड़े एफर्ट्स डालो, मुझे इम्प्रेस करो।" कबीर के होठों पर एक गहरी, जानलेवा मुस्कान थी। वह कबीर मल्होत्रा था, जिसे दुनिया तबाही का दूसरा नाम मानती थी, और आज वह एक लड़की के नखरे उठाने के लिए खुद शेफ बना था।
कबीर ने बिना नॉक किए मायरा के कमरे का दरवाज़ा खोला और भीतर दाखिल हुआ। कमरा मद्धम लाइट्स में डूबा हुआ था। बेड पर मायरा अपनी टांगें सिकोड़े बैठी थी, उसके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान थी और वह अपने आईफोन की स्क्रीन पर अपनी उंगलियों को बड़ी तेज़ी से चला रही थी। वह अपने कॉलेज के एक मेल फ्रेंड (रोहन) के साथ चैटिंग में पूरी तरह मसरूफ थी।


















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