डाइनिंग टेबल पर रखे खाने के बर्तन अब ठंडे हो चुके थे, लेकिन टेबल के नीचे और ऊपर का माहौल वासना की भयंकर आग में पूरी तरह सुलग रहा था। दीवान साहब का भारी और खुरदरा हाथ रागिनी की साड़ी के पल्लू को पूरी तरह से हटाकर उसकी गहरी क्लीवेज पर जम चुका था। रागिनी की सांसें तेज़ थीं और उसकी आँखें आधी बंद हो चुकी थीं।
दीवान साहब ने बिना और वक्त गंवाए अपने दोनों भारी हाथों को रागिनी के ब्लाउज के ऊपर से ही उसके दोनों भरे हुए स्तनों पर जमा दिया और उन्हें पूरी ताकत से भींचना और मसलना (Started crushing and kneading her breasts aggressively) शुरू कर दिया। उनका वह खुरदरा स्पर्श रागिनी के कोमल मांस में धंसता चला गया।



















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