कमरे में मोमबत्तियों की लौ अब आख़िरी सांसें ले रही थी, लेकिन शौर्य और अद्रिका के बीच की आग अपनी चरम सीमा पर थी। अद्रिका फूलों के बिस्तर पर बेसुध सी पड़ी थी, उसकी टांगें फैली हुई थीं और उसका पूरा वजूद शौर्य की जुबान के जादू से कांप रहा था। शौर्य ने अपना चेहरा ऊपर उठाया, उसके होठों पर अद्रिका की नमी चमक रही थी।
शौर्य ने अपनी गहरी नज़रों से अद्रिका की उस गुलाबी गहराई को देखा जो अब पूरी तरह से भीग चुकी थी। उसने एक कुटिल मुस्कान के साथ कहा, "देख रही हो अद्रिका... तेरी ये 'चूत' मेरे 'लौड़े' के लिए कितना रस छोड़ रही है। इसे भी पता है कि इसका मालिक कौन है।"


















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