एक तरफ जहां उस पुरानी हवेली में आसिफ़ और ज़ोया के दरमियान वासना और हवस का तूफान अपने उरूज पर था, वहीं शहर के दूसरे कोने में स्थित एक आलीशान, लेकिन सन्नाटे में डूबे बड़े से मकान में तकदीर का एक और खौफनाक और वर्जित खेल आकार ले रहा था।
शहर के पॉश इलाके में स्थित इस दो मंज़िला बड़े मकान पर मातमी सन्नाटा छाया हुआ था। कुछ दिन पहले ही इस घर के छोटे बेटे रोहन की एक दर्दनाक कार हादसे में मौत हो गई थी। रोहन की शादी को सिर्फ एक महीना ही हुआ था कि उसकी नई-नवेली, बेहद खूबसूरत और कम उम्र दुल्हन सुहाना (उम्र 21 वर्ष) विधवा हो गई। सुहाना का गोरा रंग, छरहरा बदन, सुडौल जिस्म और उसकी मासूमियत किसी को भी दीवाना बनाने के लिए काफी थी। रोहन के पिता (ससुर जी) का इंतकाल पहले ही हो चुका था। घर में अब सुहाना के अलावा सिर्फ उसका जेठ विक्रम (उम्र 35 वर्ष) ही बचा था, जिसका कुछ साल पहले ही अपनी पत्नी से तलाक हो चुका था।



















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