आधी रात का सन्नाटा अब विला के उस कमरे में एक भारी और मादक तनाव में तब्दील हो चुका था। मेज पर रखी नोटबुक और पेन अब खामोश थे, लेकिन शौर्य के भीतर का वहशी जुनून अब जाग चुका था। उसने अपनी शर्ट पहले ही उतारकर फर्श पर फेंक दी थी, जिससे उसकी जख्मी लेकिन सख़्त पीठ और चौड़ा सीना मद्धम रोशनी में चमक रहा था।
अद्रिका शौर्य की गोद में कैद थी, उसका दिल किसी पिंजरे में बंद पंछी की तरह फड़फड़ा रहा था। शौर्य ने अपनी गर्दन झुकाई और अद्रिका के कान के बिल्कुल पास जाकर अपनी गर्म और भारी सांसें छोड़ीं। उसकी आवाज़ इतनी सिडक्टिव (Seductive) थी कि अद्रिका के पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।


















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