रात के उस तूफानी और जुनून भरे सफर का अंत कब हुआ, यह न तो अयान को पता चला और न ही ज़ोया को। अयान की वहशत ऐसी थी कि उसने एक के बाद एक कई राउंड लिए, मानो वह ज़ोया के शरीर के एक-एक इंच को अपनी जागीर घोषित कर देना चाहता हो। जब सुबह की पहली सुनहरी किरण अमेरिका के उस आलीशान मैन्शन के मास्टर बेडरूम की खिड़की से छनकर आई, तब जाकर कमरा शांत हुआ था।
सुबह की रोशनी जब ज़ोया की पलकों पर पड़ी, तो उसने धीरे से अपनी आँखें खोलीं। वह अयान की लोहे जैसी मज़बूत बाहों में पूरी तरह सिमटी हुई थी। कमरे की हवा में अभी भी रात के उस 'गंदे खेल' और जिस्मों के मिलन की गंध घुली हुई थी। ज़ोया ने अयान के सोते हुए चेहरे को देखा—वह 'हार्टलेस' इंसान नींद में कितना शांत लग रहा था, जबकि कल रात उसने किसी दरिंदे की तरह ज़ोया के जिस्म को नोचा और प्यार किया था।



















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