सिंहानिया मेंशन का वह कमरा, जो अभी कुछ देर पहले अभिमन्यु और सुहानी के बीच एक सुकून भरे संवाद का गवाह था, अब एक भयानक दरिंदगी के अखाड़े में बदल चुका था। देवराज सिंहानिया, जिसकी आँखों में नफ़रत और कामुकता का गहरा काला जहर भरा था, सुहानी के वजूद को तार-तार करने पर उतारू था।
सुहानी, जो अभी भी सदमे और दर्द से कांप रही थी, उसके फटे हुए ब्लाउज़ के नीचे से उसके उभरे हुए, बेहद नाज़ुक ब्रेस्ट्स देवराज की वहशी नज़रों के सामने थे। देवराज ने बिना एक पल की देरी किए, सुहानी के ब्रेस्ट्स को अपने हाथों में ऐसे जकड़ा जैसे कोई शिकारी अपना शिकार दबा रहा हो।


















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