हवेली के गलियारों में सन्नाटा था, लेकिन सिया के कमरे के भीतर हवाओं में एक अलग ही बेचैनी और गर्मी घुली हुई थी। भारी मखमली पर्दों के पीछे, जहाँ बाहर की दुनिया की कोई दस्तक नहीं पहुँच सकती थी, वहाँ मलिक साम्राज्य के तीन ताकतवर वारिस—अद्वैत, देवांश और रेयार्थ—मौजूद थे। उनके चेहरे पर अभी भी उस बड़े झूठ की थकान थी जो उन्होंने अपनी माँ मेहर से बोला था।
कमरे की हल्की रोशनी में सिया बेड के किनारे बैठी थी, उसकी नजरें इन तीनों पर टिकी थीं। अभी थोड़ी देर पहले डाइनिंग हॉल में जो ड्रामा हुआ था, उसकी यादें अभी भी उन सबके जेहन में ताजा थीं।


















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