अगले कुछ घंटे अस्पताल के गलियारों में सन्नाटे के साथ बीते। सिद्धार्थ और अन्य परिजन बाहर के काम निपटाने में लगे थे, जबकि अद्रिका ने रसोई में जाकर शौर्य के लिए उसके पसंदीदा व्यंजन तैयार किए। वह जानती थी कि शौर्य को घर का खाना कितना पसंद है और अस्पताल की उन बोरियत भरी चीज़ों से उसे नफरत है।
वीआईपी वार्ड के अंदर दाखिल हुई। शौर्य बेड पर लेटा हुआ खिड़की के बाहर घूर रहा था, लेकिन अद्रिका की आहट मिलते ही उसकी आँखों में एक अलग तरह की चमक आ गई।



















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