कॉलेज के कॉरिडोर में पसरा सन्नाटा अद्रिका के जूतों की आवाज़ से टूट रहा था। क्लास खत्म हो चुकी थी, लेकिन अद्रिका के भीतर का गुस्सा और उत्तेजना का मिला-जुला तूफ़ान अभी भी शांत नहीं हुआ था। क्लास की उन लड़कियों की घिनौनी और हवसी बातें अभी भी उसके कानों में गूँज रही थीं। उसने गहरी सांस ली और अपने केबिन की तरफ़ कदम बढ़ा दिए, यह सोचकर कि अब जाकर वह थोड़ा सुकून महसूस करेगी।
अद्रिका ने जैसे ही अपने केबिन का दरवाज़ा खोला और अंदर कदम रखा, उसके पैर वहीं के वहीं जम गए। केबिन के भीतर की हवा में सिगरेट के धुएं का एक मद्धम सा छल्ला तैर रहा था, और उसकी परिचित कड़वी महक कमरे में फैली हुई थी।



















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