वाशरूम का भारी शीशम का दरवाज़ा बंद होते ही बाहर की तमाम आवाज़ें कट गईं। अमन ने पीठ टिकाकर एक लंबी, उफ़नती हुई सांस ली।
उसकी छाती तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी। माथे पर ठंडे पानी की कुछ बूंदों के बावजूद उसके अंदर एक भयंकर आग सुलग रही थी। उसकी आँखों के सामने बार-बार आस्था का वो नज़ारा आ रहा था—ओवरसाइज़्ड सफ़ेद शर्ट में उसका गोरा, मखमली शरीर, शर्ट की ढीली आस्तीनों से झलकती सुराहीदार गर्दन, और नंगे पैरों की वो बेपरदा रसीली रंगत।



















Write a comment ...