कॉलेज की पार्किंग से धूल उड़ाती हुई आर्यन की काली स्पोर्ट्स कार अब शहर के शोर-शराबे से दूर एक सुनसान वन-वे सड़क के किनारे खड़ी थी। बाहर पेड़ों की घनी छाँव थी और दूर-दूर तक कोई इंसान नज़र नहीं आ रहा था। कार के भीतर का तापमान बाहर की गर्मी से कहीं ज़्यादा बढ़ चुका था। तान्या के उस 'अधिकार' भरे लहजे और कॉलेज की उन लड़कियों की हवस भरी नज़रों ने आराध्या के भीतर एक ऐसी आग जला दी थी जिसे अब केवल आर्यन का स्पर्श ही शांत कर सकता था।
आर्यन ने इंजन बंद किया, लेकिन कार के भीतर 'एसी' की हल्की सरसराहट अभी भी गूँज रही थी। उसने सीट बेल्ट हटाई और बगल में बैठी आराध्या की ओर मुड़ा। आराध्या अभी भी गुस्से में अपनी निचली लिपस्टिक को दाँतों तले दबा रही थी, उसकी छाती गुस्से और तेज़ साँसों के कारण तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी।



















Write a comment ...