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chapter 49 यह मेरा नाम है... पर ये माता-पिता कौन हैं?

झील का पानी चांदनी में चांदी की तरह चमक रहा था, लेकिन उस चमक के पीछे एक गहरा सन्नाटा छिपा था। मेज पर रखा वह पीला पड़ चुका कागज़ आराध्या की नज़रों के सामने किसी बम की तरह था, जो फटने के लिए बस एक इशारे का इंतज़ार कर रहा था। आर्यन की आँखें स्थिर थीं, उनमें एक अजीब सा भारीपन था—जैसे वह बरसों से इस राज़ को अपने सीने पर पत्थर की तरह ढो रहा हो।

आराध्या के हाथ कांप रहे थे। उसने धीरे से उस कागज़ को उठाया। वह एक कानूनी दस्तावेज़ था, जिस पर 'गोद लेने का प्रमाण पत्र' (Adoption Certificate) लिखा था। ऊपर उसके असली माता-पिता का नाम था और नीचे खन्ना परिवार का।

"यह... यह क्या है आर्यन?" आराध्या की आवाज़ गले में ही अटक गई थी। "यह मेरा नाम है... पर ये माता-पिता कौन हैं?"

आरयन ने एक गहरी ठंडी साँस ली और उसका हाथ थाम लिया। "आराध्या, आज से अठारह साल पहले, डैड के सबसे करीबी दोस्त मिस्टर और मिसेज शर्मा का एक भयंकर कार एक्सीडेंट हुआ था। वह एक्सीडेंट इतना घातक था कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। उस कार में एक डेढ़ साल की बच्ची भी थी, जो चमत्कारिक रूप से बच गई थी।"

आराध्या की आँखों से एक आंसू टपक कर उस कागज़ पर गिरा। उसे धुंधला-धुंधला सा अहसास होने लगा कि आर्यन किस ओर इशारा कर रहा है।

"वह बच्ची तुम थी, आराध्या," आर्यन की आवाज़ भारी हो गई। "हमारे माता-पिता ने तुम्हें उसी वक्त गोद ले लिया था। उन्होंने दुनिया को यही बताया कि तुम उनकी सगी बेटी हो, ताकि तुम्हें कभी यह अहसास न हो कि तुम अनाथ हो। उन्होंने तुम्हें वही प्यार दिया, वही नाम दिया, जो एक सगी औलाद को मिलता है। यहाँ तक कि मुझे भी बहुत सालों तक यही पता था कि तुम मेरी छोटी बहन हो।"

आराध्या का सिर चकराने लगा। उसकी पूरी दुनिया, उसकी पहचान, उसका अतीत—सब कुछ एक पल में ताश के पत्तों की तरह ढह गया। जिसे वह अपना खून समझती थी, वह सिर्फ एक अहसान था? जिसे वह अपनी माँ समझती थी, वह उसकी माँ नहीं थी?

"लेकिन तुम्हें यह सब कैसे पता चला?" आराध्या ने सुबकते हुए पूछा। "क्या डैड ने तुम्हें बताया?"

"नहीं," आर्यन ने कड़वाहट भरी मुस्कान के साथ कहा। "मॉम-डैड के जाने से कुछ दिन पहले, मैं उनके कमरे के बाहर से गुज़र रहा था। मैंने उन्हें आपस में बात करते सुना। वे कह रहे थे कि अब वक्त आ गया है कि तुम्हें सच बता दिया जाए, क्योंकि वे हम दोनों के बीच बढ़ती नजदीकियों को देख रहे थे।"

आर्यन थोड़ा रुका और फिर उसने वह बात कही जिसने आराध्या के दिल की धड़कन रोक दी।

"डैड कह रहे थे कि वे बहुत जल्द हमारी सगाई (Engagement) करवा देंगे। मॉम ने कहा कि वे तुम्हें किसी और घर की बहू बनकर जाते हुए नहीं देख सकते। वे चाहते हैं कि तुम हमेशा इसी घर में रहो, खन्ना परिवार का हिस्सा बनकर। वे जानते थे कि हमारे बीच जो खिंचाव है, वह भाई-बहन वाला नहीं है। वे बस सही वक्त का इंतज़ार कर रहे थे ताकि तुम्हें तुम्हारी असलियत बता सकें और फिर हमारा रिश्ता पक्का कर सकें।"

आराध्या के लिए यह सब कुछ सहना मुमकिन नहीं था। एक तरफ यह जानकारी थी कि वह अनाथ है, उसके असली माता-पिता इस दुनिया में नहीं हैं—एक ऐसा गम जिसे उसने कभी महसूस ही नहीं किया था। और दूसरी तरफ यह खुशी कि उसका और आर्यन का रिश्ता अब 'पाप' नहीं था। वे सगे भाई-बहन नहीं थे, उनकी रगों में एक जैसा खून नहीं दौड़ रहा था। समाज अब उन्हें 'गंदा' नहीं कह पाएगा।

"आर्यन..." आराध्या फूट-फूट कर रोने लगी। "मैं... मैं समझ नहीं पा रही कि मैं क्या करूँ? क्या मैं इस बात की खुशी मनाऊँ कि अब मैं आपको पा सकती हूँ? कि अब हमारा प्यार गुनाह नहीं है? या फिर मैं उस बात का गम मनाऊँ कि जिसे मैंने अब तक अपनी ज़िंदगी माना, वह सब झूठ था? मैंने अपने उन माता-पिता को खो दिया जिन्हें मैंने कभी देखा तक नहीं... और जिन्हें मैं अपना समझती थी, वे मेरे सगे नहीं हैं।"

वह अपनी कुर्सी से उठी और घुटनों के बल झील के किनारे बैठ गई। उसके रोने की आवाज़ रात के सन्नाटे को चीर रही थी। आर्यन तुरंत उसके पास पहुँचा और उसे अपनी बाहों में भर लिया।

"रो लो, आराध्या। आज जी भरकर रो लो। यह बोझ बहुत भारी है," आर्यन ने उसके सिर को अपने सीने से लगा लिया।

"मैं अनाथ हूँ आर्यन... मेरा कोई नहीं है," आराध्या ने हताशा में कहा।

आर्यन ने उसका चेहरा अपने हाथों में उठाया और उसकी आँखों में झाँका। उसकी आँखों में एक ऐसी आग थी जो आराध्या के सारे डर को जला सकती थी। "तुम अनाथ नहीं हो। जब तक मैं ज़िंदा हूँ, तुम कभी अकेली नहीं हो। आज से तुम्हारा अतीत खत्म होता है और तुम्हारा भविष्य शुरू होता है। अब कोई छुपना नहीं, कोई डरना नहीं। अब हम दुनिया की आँखों में आँखें डालकर कह सकते हैं कि हम एक-दूसरे के हैं।"

आराध्या ने आर्यन की शर्ट को मुट्ठियों में जकड़ लिया। उसे अब भी यकीन नहीं हो रहा था कि जो बंधन उसे अब तक डरा रहा था, वही उसे आज़ाद कर चुका है।

"तो डैड... डैड वाकई हमारी शादी कराना चाहते थे?" उसने मासूमियत से पूछा।

"हाँ। वे जानते थे कि तुम उनके घर की लक्ष्मी हो। वे तुम्हें कभी खोना नहीं चाहते थे," आर्यन ने उसके माथे को चूमा। "अब तुम्हें समझ आया कि मैं कल रात क्यों परेशान था? मैं यह सोचकर पागल हो रहा था कि यह सच तुम्हें कैसे बताऊँ। मुझे डर था कि तुम टूट जाओगी।"

आराध्या ने अपने आंसू पोंछे। उसे महसूस हुआ कि उसके अंदर की वह 'गुनाह' वाली भावना अब खत्म हो गई थी। अब वह आर्यन को सिर्फ अपना भाई नहीं, बल्कि अपना होने वाला पति देख सकती थी।

"मुझे... मुझे थोड़ा वक्त चाहिए आर्यन। यह सब बहुत अचानक है," उसने फुसफुसाते हुए कहा।

"तुम्हारे पास पूरी ज़िंदगी है, जान," आर्यन ने उसे गोद में उठा लिया और कार की ओर बढ़ा। "अब हमें किसी अंधेरे कोने में छुपकर प्यार करने की ज़रूरत नहीं है। अब यह घर तुम्हारा है, और यह आर्यन भी सिर्फ तुम्हारा है।"

उस रात झील के किनारे एक पहचान मर गई थी, लेकिन एक नई ज़िंदगी ने जन्म लिया था। कार जब वापस घर की ओर मुड़ी, तो हेडलाइट्स की रोशनी अंधेरे को चीरती हुई जा रही थी—बिल्कुल वैसे ही जैसे यह सच उनकी ज़िंदगी के अंधेरे को चीर चुका था।

समाप्त (अध्याय 49)

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