पानी की बौछारों के बीच शावर का कांच धुंधला चुका था। माहौल में सिर्फ पानी के गिरने की आवाज़ और दोनों की उखड़ती हुई गर्म साँसों की थरथराहट गूँज रही थी।
ज़रवान की ईविल मुस्कान को देखकर सिया की आँखें गुस्से से भर उठी थीं, लेकिन उसके शरीर की हर नस इस वक्त किसी और ही धुन में थिरक रही थी। ज़रवान ने अपनी भारी आँखें सिया के चेहरे पर टिकाईं, और फिर बड़ी बेबाकी से अपना मजबूत, कसरती हाथ नीचे की तरफ बढ़ा दिया।



















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