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chapter 39 हटो साले हवसी इंसान! अब दोबारा ऐसी हिम्मत भी मत करना!"

सूरज की किरणें अब कमरे की कांच की खिड़कियों को पार करती हुई फर्श पर सुनहरी लकीरें खींच रही थीं। कमरे का माहौल पूरी तरह शांत था, जिसमें सिर्फ एसी की हल्की सी सरसराहट और सिया की धीमी, सुकून भरी साँसों की आवाज़ गूँज रही थी।

सिया बेहद सुकून की नींद सो रही थी। उसके चेहरे पर रात भर के ड्रामे और सुबह के थकाऊ वाकये के बाद एक अजीब सा ठहराव था। ज़रवान ने कुछ देर तक बिस्तर के पास बैठकर उसके शांत चेहरे को देखा। उसकी गोरी रंगत पर ढीली सफेद शर्ट बेहद खूबसूरत लग रही थी। ज़रवान ने उसके माथे पर बिखरी बालों की एक लट को बड़े प्यार से पीछे सरकाया। सिया के मासूम अहसास को महसूस करते हुए उसने अपने मन में इस सुकून को सहेजा, फिर धीरे से उठा और सोफे पर जाकर बैठ गया। उसने अपना लैपटॉप चालू किया और शांत दिमाग से अपने बिजनेस फाइल्स और ज़रूरी ईमेल निपटाने में लग गया।

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