ओहान की जीभ और ज़रवान के होठों के बीच सिया का शरीर अब पूरी तरह बेकाबू हो चुका था। ऊपर ज़रवान उसके स्तनों को चूस और मसल रहा था, नीचे ओहान उसकी योनि को चाट और चूस रहा था। दोनों की हरकतें एक साथ हो रही थीं—एक लय में, एक जुनून में। सिया की आहों की आवाज़ अब कमरे की चारदीवारी से टकराकर लौट रही थी।
‘आह्ह्ह… तुम दोनों… आह… मुझे पागल कर दोगे…!’ सिया की आवाज़ टूटी-फूटी निकली। उसकी कमर बार-बार उठ रही थी, जाँघें काँप रही थीं, और उंगलियाँ बेडशीट को नोच रही थीं।



















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