कमरे के भारी पर्दों के बीच से छनकर आती सुबह की सुनहरी रोशनी ने फर्श पर एक लंबी लकीर खींच दी थी। खन्ना हाउस के बाहर परिंदों की चहचहाहट और दूर से आती शहनाई की धीमी आवाज़ यह पैगाम दे रही थी कि आज का दिन साधारण नहीं है। आज सगाई का दिन था—वह दिन जिसने आराध्या और आर्यन के रिश्तों की परिभाषा को हमेशा के लिए बदलने का वादा किया था।
आराध्या की नींद धीरे-धीरे खुली। उसकी पलकें भारी थीं, लेकिन जैसे ही उसने करवट ली, उसे अपने पास एक अजऩबी मगर बेहद जानी-पहचानी तपिश महसूस हुई। उसने अपनी आँखें पूरी तरह खोलीं और हीरो (आर्यन) को अपने पास (Found hero near her) पाया।



















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