मल्होत्रा मेंशन की ऊपरी मंजिल का वह गलियारा आज अनन्या के लिए किसी भूलभुलैया जैसा लग रहा था। कबीर के पीछे चलते हुए उसे अपने ही कदमों की आवाज़ गूँजती हुई सुनाई दे रही थी। कबीर का कमरा बाकी भाइयों के कमरों से थोड़ा अलग, शांत और गहरे रंगों से सजा हुआ था। जैसे ही वे अंदर दाखिल हुए, कबीर ने पीछे मुड़कर भारी दरवाजा बंद कर दिया और कुंडी चढ़ा दी। उस 'क्लिक' की आवाज़ ने अनन्या के दिल की धड़कन को एक पल के लिए रोक दिया।




















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