मल्होत्रा मेंशन की उस भारी और तनावपूर्ण रात के बाद, सुबह की पहली किरण अर्नव के कमरे के रेशमी पर्दों को चीरती हुई अंदर दाखिल हुई। कमरे का वातावरण अब भी रात की उस गहरी शांति और अर्नव की मर्दाना खुशबू से महक रहा था। अनन्या (आराध्या), जो पिछले कई घंटों से दुनिया भर की थकान और उलझनों को भूलकर गहरी नींद में थी, अब धीरे-धीरे होश में आ रही थी।
जब अनन्या की आँखें खुलीं, तो उसे महसूस हुआ कि वह किसी बहुत ही सुरक्षित और मजबूत घेरे में है। उसने खुद को अर्नव की बाहों में पाया। अर्नव का एक हाथ उसकी कमर के नीचे था और दूसरा उसके सिर के पीछे। अनन्या का चेहरा अर्नव के सीने के बिल्कुल पास था। वह कुछ पलों तक बस रुकी रही, अपनी सांसों को अर्नव की सांसों के साथ मिलाते हुए।




















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