मल्होत्रा मेंशन के उस आलीशान बेडरूम में सन्नाटा इतना गहरा था कि घड़ी की हर टिक-टिक दिल की धड़कन जैसी सुनाई दे रही थी। कमरे के एक कोने में कबीर किसी मुजरिम की तरह खड़ा था, उसकी आँखों में बेबसी और जलन का सैलाब था। बिस्तर पर अनन्या (आराध्या) लेटी थी, जो आज अपने ही पतियों के बीच एक ऐसी सजा का केंद्र बन गई थी जो कबीर के लिए मुकर्रर की गई थी।
कमरे की मद्धम पीली रोशनी अनन्या के गोरे बदन पर किसी रेशम की तरह फिसल रही थी। अर्नव और आर्यन बिस्तर पर अनन्या के दोनों तरफ झुक गए। अर्नव ने अनन्या की ठुड्डी को ऊपर उठाया और उसके होंठों पर अपना अधिकार जमा लिया, जबकि आर्यन उसके गालों और गर्दन पर अपनी प्यास बुझाने लगा। अर्नव और आर्यन दोनों ही अनन्या को बड़ी शिद्दत से किस (kiss) करने लगे। अनन्या की सांसें फूलने लगी थीं, उसके भीतर गुस्से और उत्तेजना का एक ऐसा द्वंद्व चल रहा था जिसे वह खुद भी नहीं समझ पा रही थी।




















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