रात अपने अंतिम पहर की ओर बढ़ रही थी, लेकिन उस बेडरूम के भीतर समय जैसे ठहर गया था। खिड़की के बाहर समंदर की लहरें चट्टानों से टकरा रही थीं, लेकिन कमरे के अंदर का शोर उससे कहीं ज्यादा तीव्र और गहरा था। आर्यन और आराध्या, जो अब आधिकारिक रूप से एक-दूसरे के हो चुके थे, प्यार और वासना के उस गहरे समंदर में डूबे हुए थे जहाँ सिर्फ शरीर नहीं, बल्कि रूहें भी एक-दूसरे में घुल-मिल रही थीं।
आर्यन ने आराध्या के चेहरे को अपनी दोनों हथेलियों में कसकर पकड़ा। उसकी आँखों में जो नशा चमक रहा था, वह किसी भी शराब से कहीं ज्यादा गहरा और खतरनाक था। उसने आराध्या के माथे पर धीरे से होंठ रखे, फिर उसकी बंद पलकों को चूमा, और धीरे-धीरे नीचे उतरते हुए उसकी गर्दन, कॉलरबोन और कंधों को जीभ और होंठों से चाटने लगा। हर किस के साथ आराध्या का शरीर थिरक उठता था। आर्यन के गर्म साँस और गीले होंठ उसके शरीर के हर इंच को जैसे जगा रहे थे। आराध्या के स्तन, पेट, कमर—सब कुछ आर्यन के स्पर्श से काँप रहा था।



















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