अनन्या के दिलो-दिमाग पर डिनर टेबल की वह कड़वाहट और उस बेबस औरत की आँखों में छिपा खौफ एक गहरा घाव छोड़ गया था। मल्होत्रा हवेली की भव्यता के पीछे छिपी दरिंदगी अब उसके सामने नग्न खड़ी थी। जैसे ही वे पाँचों ऊपर अपने कमरे में पहुँचे और भारी दरवाजा बंद हुआ, बाहर का दम घोंटने वाला सन्नाटा पीछे छूट गया।
कमरे के भीतर की रोशनी मद्धम थी, लेकिन अनन्या की आँखों में अब भी वही नज़ारा घूम रहा था। वह बदहवास कमरे के बीचों-बीच खड़ी थी। चारों हीरोज डिनर के बाद उसके साथ आ गए थे। अर्णव ने जैसे ही उसे छूना चाहा, अनन्या पीछे हट गई और चिल्लाकर बोली—




















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