मास्टर बेडरूम का भारी सागौन का दरवाज़ा अंदर से बंद हो चुका था। पाँच साल के लंबे अंतराल और बेटे आरव के स्कूल चले जाने के बाद, इस विशाल मेंशन के एकांत में मल्होत्रा भाइयों का सदियों पुराना, आदिम जुनून अपनी पूरी भयावहता और कामुकता के साथ जाग उठा था। अर्णव, विहान, आर्यन और कबीर—चारों ही इस वक्त पूरी तरह से नग्न हो चुके थे, उनके गठीले, कसरती शरीरों पर नसें उभरी हुई थीं। बिस्तर के बीचोबीच बैठी अनन्या का गाउन पहले ही तार-तार हो चुका था, और उसका पूरा गोरा, सुडौल बदन अपने चार पतियों की भूखी निगाहों के सामने पूरी तरह से बेपर्दा था।
कमरे के भीतर केंद्रीय वातानुकूलित प्रणाली की ठंडी हवा चल रही थी, लेकिन बिस्तर का हर एक कोना पाँच नग्न शरीरों की गर्मी और बहते पसीने से सुलग रहा था। पाँच साल तक माँ की ज़िम्मेदारियों में बंधी अनन्या आज अपने भीतर की दबी हुई औरत को पूरी तरह आज़ाद कर चुकी थी। उसने अपनी मदहोश आँखों से अर्णव के सख्त dick को देखा और बहुत ही bold बातें करते हुए कहा, “आज मैं कहीं नहीं भागूँगी… आप चारों मिलकर मुझे इस तरह नोचिए कि मेरी रूह काँप जाए।”




















Write a comment ...