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Chapter 1 rebirth aur shock

बे-इंतहा दर्द।

वही पहला अहसास था जो उसके वजूद को छूकर गुज़रा। ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके सिर पर सैकड़ों हथौड़े एक साथ दे मारे हों। आँखों के आगे घना, काला अँधेरा था और कानों में एक अजीब सन्नाटा गूँज रहा था—जैसे कोई गहरा कुआँ हो, जिसमें सिर्फ़ ख़ामोशी ही ख़ामोशी रह गई हो।

‘मैं… मैं कहाँ हूँ?’

उसने दिमाग़ पर ज़ोर डाला। आख़िरी याद—एक ट्रक की चमकती हेडलाइट्स, सड़क पर टायरों के घिसने की ख़ौफ़नाक आवाज़, और फिर एक जोरदार धमाका। एक अनाथ लड़की, जिसकी पूरी ज़िंदगी सड़क के कचरे से लेकर ढाबों पर बर्तन धोने और छोटे-मोटे कामों में बीती थी। उसकी ज़िंदगी इतनी सस्ती थी कि एक कार एक्सीडेंट ने उसे एक पल में ख़त्म कर दिया था। वो तो मर चुकी थी। फिर यह दर्द क्यों?

पलकें भारी थीं, जैसे उन पर पिघला हुआ सीसा डाला गया हो। धीरे-धीरे धुँधली रोशनी उसकी आँखों में घुसी। सबसे पहले एक चमकदार सफ़ेद छत दिखाई दी, जिस पर कीमती क्रिस्टल का झूमर लटका हुआ था। ऐसी चीज़ें उसने सिर्फ़ अमीरों के घरों के बाहर से झाँककर या टीवी पर देखी थीं।

गर्दन मोड़ने की कोशिश की। वो एक नरम, मखमली बिस्तर पर लेटी हुई थी। कमरे की हवा में महँगे फ्रेंच परफ्यूम और लैवेंडर की महक घुली हुई थी।

“यह… यह कहाँ हूँ मैं?” उसके गले से एक धीमी, लड़खड़ाती आवाज़ निकली।

पर यह आवाज़… उसकी अपनी नहीं थी। उसकी आवाज़ थोड़ी भारी और कशिश वाली थी। यह आवाज़ बेहद नाज़ुक, मीठी और एक अलग ही धुन में थी।

दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। हथेलियों में पसीना आ गया। उसने अपने हाथ उठाकर देखे। रोज़ की धूप और मेहनत से कड़ी, सांवली रंगत गायब थी। उनकी जगह एकदम सफ़ेद, मक्खन जैसी रंगत वाली लंबी-नाज़ुक उँगलियाँ थीं, जिन पर महँगा मेनीक्योर चमका हुआ था।

“यह क्या बकवास है?” घबराकर वो बिस्तर पर उठ बैठी। सिर में तेज़ टीस उठी, पर ख़ौफ़ ने दर्द को पीछे छोड़ दिया।

बिस्तर से उतरी तो पैरों के नीचे नरम, कीमती कालीन था। कमरा किसी महल के शाही बेडरूम से कम नहीं था। हर फ़र्नीचर एंटीक और लाखों की क़ीमत का लग रहा था।

दिल सीने से बाहर आने को था। नज़र घुमाई तो बाईं तरफ़ सागवान के बड़े दरवाज़े वाला वॉशरूम दिखा। लड़खड़ाते कदमों से भागी।

दरवाज़ा खोला तो आँखें फटी की फटी रह गईं। वॉशरूम किसी आम मकान से भी बड़ा था—मार्बल की दीवारें, जकूज़ी बाथटब, और सामने एक विशाल इटैलियन ग्लास का आइना।

आइने के सामने जाकर खड़ी हो गई। और जो देखा, उसने उसके पैरों तले ज़मीन निकाल दी।

आइने में खड़ी लड़की वो नहीं थी।

बेहद हसीन, ख़ूबसूरत, पर मगरूर और बेशर्म नज़र आने वाली लड़की। गोरी रंगत, बड़ी-बड़ी सुरमई आँखें, पतली कमर, शार्प फ़ीचर्स। सिर पर सफ़ेद पट्टी बँधी थी, जिस पर खून का छोटा सा धब्बा था।

गालों को दोनों हाथों से छुआ। आइने वाली ने भी छुआ। पलकें झपकाईं—आइने वाली ने भी।

“नहीं… नहीं, नहीं, नहीं! यह मैं नहीं हूँ!” साँस फूलने लगी। “मैं तो रिया हूँ… एक अनाथ… मेरा एक्सीडेंट हुआ था… मैं मर गई थी!”

तभी सिर के अंदर एक तेज़ धमाका सा हुआ। हज़ारों स्मृतियाँ, यादें और दृश्य बिजली की तरह कौंधने लगे। दर्द से सिर दोनों हाथों में पकड़ लिया और मार्बल फ़्लोर पर बैठ गई।

‘अनन्या… अनन्या राठौड़…’

यह उस लड़की का नाम था जिसकी बॉडी में वो अभी थी। जैसे ही पुरानी अनन्या की यादें खुलने लगीं, रिया का मुँह खुला का खुला रह गया।

पुरानी अनन्या बेहद लालची, मक्कार, चालाक और चीप लड़की थी। राठौड़ ख़ानदान की पुरानी प्रथा की वजह से इस महल में आई थी—ख़ानदान की शान और लेगेसी बचाने के लिए एक ख़ास क़िस्म की योग्य कन्या से शादी। पर हालात ऐसे बने कि उस प्रथा के तहत अनन्या की शादी किसी एक से नहीं… बल्कि राठौड़ ख़ानदान के पाँचों भाइयों से एक साथ हुई थी!

“पाँच… पाँच पति?!” आवाज़ वॉशरूम में गूँज उठी। आँखें बाहर आने को हो गईं।

नॉवेल्स में, फ़िक्शन में ऐसी कहानियाँ पढ़ी थीं। लेकिन रियल लाइफ़ में? यह उसके साथ क्या हो रहा था?!

पर कहानी यहीं ख़त्म नहीं हुई। असली ख़ौफ़ तो अभी शुरू हुआ था।

पाँचों भाइयों ने शादी के पहले दिन ही साफ़ बोल दिया था—यह शादी सिर्फ़ प्रथा और रिवाज़ का मज़बूरी भरा हिस्सा है। उनके दिल में उसके लिए कोई जगह नहीं।

रिया के दिमाग़ में उन पाँचों के चेहरे एक-एक करके घूमने लगे, और उनके साथ पुरानी अनन्या की वाहियात हरकतें भी।

रणवीर सिंह राठौड़ — सबसे बड़ा। डोमिनेंट, स्ट्रिक्ट, राठौड़ एम्पायर का सरबराह। शादी के पहले दिन ही स्टडी रूम में ठंडी आवाज़ में कहा था—

“इस शादी को सिर्फ़ एक सामाजिक समझौता समझना। तुम्हें आलीशान ज़िंदगी मिलेगी, जितना पैसा चाहे मिलेगा। पर मेरी या मेरे भाइयों की ज़िंदगी में दख़ल देने की कोशिश मत करना। हमारी बीवी बनने की ग़लतफ़हमी मत पालना।”

पुरानी अनन्या? हवस और दौलत की अँधी। रणवीर के मना करने के बावजूद उसके प्राइवेट बेडरूम में रात को बेहद रिवील कपड़ों में घुसने की कोशिश की। अल्कोहलिक ड्रिंक में कुछ मिलाकर अपना बनाने का गंदा प्लान बनाया। रणवीर ने पकड़कर गर्दन से दबोचा और दूर फेंक दिया। उसके अंदर सिर्फ़ नफ़रत भर चुकी थी।

सूर्यवंश सिंह राठौड़ — दूसरा। कोल्ड, साइलेंट असासिन जैसा बिज़नेस टाइकून। साफ़ कह दिया था—दूर रहो। अनन्या ने उसकी एक बहुत इम्पोर्टेंट बिज़नेस डील के डॉक्यूमेंट्स चुरा लिए ताकि ब्लैकमेल करके अपने पास बुला सके। सूर्यवंश ने डॉक्यूमेंट्स वापस ले लिए, पर उस दिन के बाद से अनन्या को जहरीले साँप से ज़्यादा कुछ नहीं समझता था।

समर प्रताप सिंह राठौड़ — तीसरा। शॉर्ट-टेम्पर्ड, अग्रेसिव और डेंजरस। पहले दिन से नफ़रत करता था। अनन्या ने जिम वर्कआउट के दौरान बेहद चीप तरीके से क़रीब जाने की कोशिश की। समर ने ज़मीन पर पटक दिया और वॉर्न किया—“अगर अगली बार तुमने मेरे पाँच फ़ीट के दायरे में क़दम रखा, तो मैं भूल जाऊँगा कि तुम एक औरत हो।”

रियांश सिंह राठौड़ — चौथा। सामने से चार्मिंग, अंदर से रूथलेस मैनिपुलेटर। अनन्या ने उसकी गाड़ी के ब्रेक फ़ेल करवा दिए ताकि एक्सीडेंट का ड्रामा करके सिम्पैथी गेन कर सके। रियांश को पता चल गया। मुँह पर कहा—“तुम्हारा दिमाग़ गुंडागर्दी से भरा है। तुम एक घटिया औरत हो।”

नकुल सिंह राठौड़ — सबसे छोटा। रेबेल, वाइल्ड और रेकलेस। अनन्या ने उसके दोस्तों के सामने फ़िज़िकली क्लोज़ होने की कोशिश की। नकुल ने गुस्से में पूरी पार्टी के सामने उस पर ड्रिंक फेंक दी और “लालची चिपको” बोलकर बेइज़्ज़त किया।

वॉशरूम के ठंडे फ़्लोर पर बैठी रिया का जिस्म काँप रहा था। पुरानी अनन्या की हरकतें हॉरर फ़िल्म की तरह चल रही थीं।

“छी! यह लड़की कितनी लालची और बेवकूफ़ थी!” गुस्से में दोनों गालों पर हल्का थप्पड़ मारा। “यह क्या हरकतें थीं?! किसी को ज़बरदस्ती अपने पास बुलाने के लिए यह सब किया जाता है? यह तो शुद्ध पागलपन था!”

गुस्सा सातवें आसमान पर था। फिर आया बेहद ख़ौफ़नाक डर।

ये पाँचों भाई आम इंसान नहीं थे। राठौड़ ख़ानदान के पाँचों ‘राक्षस’ थे। हर एक के पास इतनी पावर, पैसा और रूथलेस माइंड था कि चाहें तो एक सेकंड में किसी को ज़मीन के अंदर दफ़न कर दें और पुलिस को ख़बर तक न हो। उनकी आँखों में पुरानी अनन्या के लिए सिर्फ़ नफ़रत थी।

और थोड़ी देर पहले का एक्सीडेंट… वो भी पुरानी अनन्या का नया ड्रामा था! समर को इम्प्रेस करने के लिए बालकनी से कूदने का नाटक कर रही थी, पैर फिसल गया और सिर ज़मीन पर जा लगा।

“हे भगवान… हे भगवान!” टाइल्स पर हाथ जोड़ लिए। आँखों में आँसू आ गए।

“यह आपने मेरे साथ क्या नाइंसाफ़ी की है?! मैं तो एक सीधी-सादी, भोली लड़की थी। कभी किसी का बुरा नहीं किया। ज़िंदगी भर ढाबों पर काम किया, अनाथ आश्रम में रही, रूखी-सूखी रोटी खाई। मुझे मरने के बाद स्वर्ग नहीं दिया तो कोई बात नहीं, पर यह कौन से नर्क में भेज दिया?!”

रोते हुए बोली, “मुझे रीबर्थ देना ही था तो किसी आम, ग़रीब या शांत लड़की की बॉडी में दे देते! इस ज़हरीली, लालची और चीप लड़की के जिस्म में क्यों भेजा?! और ऊपर से ये पाँच पति?! ये पाँच पति नहीं, पाँच डेविल हैं! पाँच राक्षस हैं! अगर उन्हें पता चला कि मैं होश में आ गई हूँ, तो वो मुझे ज़िंदा गाड़ देंगे!”

मुँह दोनों हाथों से ढँक लिया। रोंगटे खड़े हो रहे थे। पुरानी अनन्या की हरकतों की वजह से पाँचों भाई इस जिस्म से नफ़रत करते थे। उनका बस चलता तो कब का इस महल से बाहर फेंक चुके होते, पर ख़ानदान की प्रथा और दादा जी के कानूनी काग़ज़ात की वजह से मजबूर थे। पर उनकी बर्दाश्त की एक सीमा थी।

“नहीं… नहीं, रिया। तुझे शांत रहना होगा।” लंबी साँस ली, आँसू पोंछे।

आइने में दोबारा देखा और खुद से वादा किया—

“मैं इस पुरानी लड़की जैसी बिल्कुल नहीं हूँ। मैं किसी के पास नहीं जाऊँगी। मैं किसी को नहीं रिझाऊँगी। मुझे किसी के पैसे, किसी के जिस्म या किसी के हक़ की ज़रूरत नहीं है!”

आइने में अपनी आँखों में आँखें डालकर बोल्ड आवाज़ में कहा—

“अब से… मैं उन पाँच डेविल भाइयों के रास्ते में कभी नहीं आऊँगी। उन्होंने बोला था न कि उनसे दूर रहूँ और जो चाहे करूँ? बस! मैं उनसे सौ फ़ीट की दूरी बनाकर रखूँगी। अगर वो बाएँ जाएँगे, तो मैं दाएँ भागूँगी। उनके सामने आना तो दूर, मैं उनके साए से भी दूर रहूँगी!”

सिर पकड़कर दोबारा बोली, “भगवान जी, आपने मेरे साथ नाइंसाफ़ी तो बहुत बड़ी की है, पर अब मैं अपनी जान इतनी सस्ते में नहीं गँवाऊँगी। मैं उन पाँचों राक्षसों से बचती रहूँगी। उन्हें लगेगा कि मैं बदल गई हूँ या मर गई हूँ, जो भी लगे… बस वो मुझे बख़्श दें!”

तभी वॉशरूम के बाहर, मेन बेडरूम का दरवाज़ा एक तेज़ आवाज़ के साथ खुला।

BANG!

भारी, ठंडी और रोबदार क़दमों की आवाज़ बेडरूम में गूँजी। ऐसा लगा जैसे कोई शेर अपने इलाके में दाख़िल हुआ हो।

“अनन्या!”

गहरी, कोल्ड और नफ़रत से भरी आवाज़ वॉशरूम के दरवाज़े तक आई।

रिया का दिल एक पल के लिए धड़कना बंद हो गया। पूरा जिस्म थर-थर काँपने लगा। वो आवाज़… राठौड़ ख़ानदान के सबसे बड़े भाई—रणवीर सिंह राठौड़ की थी!

“अनन्या! बाहर निकलो। तुम्हारा नया ड्रामा अब बहुत हुआ। नाटक बंद करो और बाहर आओ!” आवाज़ में इतना गुस्सा और चिढ़ थी कि वॉशरूम के काँच तक वाइब्रेट होने लगे।

रिया ने साँस रोक ली। दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था जैसे अभी सीने को फाड़कर बाहर आ जाएगा। वॉशरूम के दरवाज़े को देखा और मन ही मन प्रार्थना करने लगी—

‘हे भगवान… मुझे बचा लेना। ये पहला राक्षस तो बाहर ही खड़ा है!’

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