पूल साइड पर तीनों खड़े थे। अनन्या के कपड़े पूरी तरह भीग चुके थे और शरीर से चिपक गए थे। ठंडी हवा उसके गीले बालों को चेहरे पर उड़ा रही थी। रणवीर ने तौलिया उसके कंधों पर और कस दिया, पर आँखों में वह शरारत साफ़ थी जो पानी के अंदर शुरू हुई थी। सूर्यवंश उसके दूसरी तरफ़ खड़ा था। दोनों की नज़रें अनन्या के भीगे जिस्म पर थीं—कुरते के नीचे से उभरती आकृतियाँ, सलवार का चिपकना, और पानी की बूँदें जो गर्दन से नीचे सरक रही थीं।
रणवीर पहले बोला। आवाज़ धीमी और भारी थी।



















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