पूल का पानी अब शांत हो चुका था। अनन्या की साँसें अभी भी तेज़ थीं। पानी के अंदर हुई बेपनाह छूअन, दोनों भाइयों की नटखट शरारतें और लगातार प्यार ने उसके शरीर को पूरी तरह थका दिया था। वह अब और खड़ी नहीं रह सकती थी। सिर अपने-आप रणवीर के चौड़े सीने पर टिक गया। आँखें बंद हो गईं। शरीर ढीला पड़ गया।
रणवीर ने नीचे झुककर उसके चेहरे को देखा। सूर्यवंश भी पास ही था। दोनों मासूम पत्नी की यह थकी हुई हालत देखकर धीरे से मुस्कुरा दिए। कोई शरारत नहीं, कोई छेड़खानी नहीं—सिर्फ़ एक शांत समझ। उन्होंने अनन्या को पानी से बाहर निकाला। रणवीर ने उसे बहुत नज़ाकत से अपनी बाँहों में उठा लिया। सूर्यवंश ने तौलिया उसके शरीर पर डाल दिया और तीनों धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़कर मास्टर बेडरूम में आ गए।



















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