रियांश के बिखरे हुए बेडरूम में अभी भी शराब की हल्की गंध बाकी थी। फर्श पर टूटे फोन के टुकड़े और खाली बोतलें पड़ी थीं। रियांश अनन्या के क़दमों में बैठा फूट-फूटकर रो रहा था। माफ़ी की भीख माँगते हुए उसके कंधे काँप रहे थे। आँसू उसके चेहरे को पूरी तरह भीगो चुके थे। अनन्या कुछ पल के लिए शांत खड़ी रही। दिल के अंदर कई भावनाएँ एक साथ उठ रही थीं—सहानुभूति, पुराना दर्द, और एक अजीब सी थकान। फिर उसने बहुत नरमी से रियांश के काँपते हुए कंधों को थामा और उसे धीरे से सोफे पर वापस बिठाया।
अनन्या आगे बढ़ी। रियांश का रोता हुआ, आँसुओं से भीगा चेहरा अपने दोनों हाथों में भरा। सीधे उसकी आँखों में देखा। उसकी नज़रों में रियांश के लिए नफ़रत का एक तिनका भी नहीं था। सिर्फ़ एक गहरी समझ और मजबूती थी।



















Write a comment ...